गणेश चतुर्थी 2026: दाईं ओर सूंड वाले नाहर वाले गणपति की खास मान्यता
देशभर में गणेश चतुर्थी 2026 का उत्साह देखने को मिल रहा है। भगवान गणेश के मंदिरों में भक्त बप्पा के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। इसी बीच जयपुर का नाहर वाले गणपति मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
जयपुर के ब्रह्मपुरी इलाके में नाहरगढ़ की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित यह मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां विराजमान भगवान गणेश की दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाली प्रतिमा है।
कहां स्थित है नाहर वाले गणपति मंदिर?
नाहर वाले गणपति मंदिर राजस्थान के जयपुर शहर के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में स्थित है। यह नाहरगढ़ की पहाड़ियों की तलहटी के पास है।
मान्यता और स्थानीय जानकारी के अनुसार यह मंदिर करीब 250 वर्ष पुराना है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
दाईं ओर सूंड वाले गणेश क्यों हैं खास?
इस मंदिर की सबसे खास बात भगवान गणेश की प्रतिमा है। यहां गणपति जी की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है।
मंदिर के महंत पंडित जय शर्मा के अनुसार, धार्मिक परंपरा में दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को दक्षिणाभिमुखी गणपति कहा जाता है। इन्हें सिद्धिविनायक स्वरूप से भी जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसे गणपति की पूजा से भक्त धन, वैभव, सफलता और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह धार्मिक आस्था और परंपरा का विषय है।
गणेश चतुर्थी से पहले होता है सिंजारा उत्सव
नाहर वाले गणपति मंदिर में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले सिंजारा उत्सव मनाया जाता है।
इस दौरान भगवान गणेश को विशेष पोशाक और साफा अर्पित किया जाता है। मंदिर में बड़ी संख्या में मोदकों की झांकी भी सजाई जाती है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है।
यहां क्यों चढ़ाई जाती है मेहंदी और सिंदूर?
सिंजारा उत्सव के दौरान भगवान गणेश को मेहंदी और सिंदूर अर्पित करने की परंपरा है।
पूजा के बाद यह मेहंदी और सिंदूर श्रद्धालुओं में भी बांटा जाता है। मंदिर के महंत के अनुसार, इसे लेने के लिए दूर-दूर से भक्त जयपुर पहुंचते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि मंदिर का सिंदूर और मेहंदी मांगलिक कार्यों में आने वाली परेशानियों को दूर करने में सहायक होते हैं। कुछ भक्त इसे विवाह और प्रेम संबंधों से जुड़ी बाधाओं को दूर करने की आस्था से भी जोड़ते हैं।
जयपुर के ये 3 मंदिर मेहंदी-सिंदूर के लिए प्रसिद्ध
मंदिर के महंत के अनुसार राजस्थान में कई जगहों पर मेहंदी और सिंदूर बांटने की परंपरा है। लेकिन जयपुर के तीन मंदिर इसके लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।
इनमें शामिल हैं:
- नाहर वाले गणपति मंदिर
- मोती डूंगरी गणेश मंदिर
- श्री गढ़ गणेश मंदिर
भक्त इन मंदिरों में अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से सिंदूर और मेहंदी लेने आते हैं।
कितने प्रकार के गणपति का वर्णन मिलता है?
मंदिर के महंत पंडित जय शर्मा के अनुसार, गणेश पुराण में गणपति के तीन प्रकार बताए गए हैं।
- बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को वाममुखी गणपति कहा जाता है।
- दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को दक्षिणाभिमुखी गणपति कहा जाता है।
- सीधी सूंड वाले गणपति की पूजा को तंत्र-मंत्र साधना और संत परंपरा से जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिणाभिमुखी गणपति को सांसारिक सुख, धन, वैभव और सफलता की कामना के लिए फलदायी माना जाता है।
गणेश चतुर्थी पर क्यों बढ़ जाती है भीड़?
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। इस दौरान भक्त गणपति की पूजा करते हैं, उन्हें मोदक का भोग लगाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
जयपुर के नाहर वाले गणपति मंदिर की अनोखी प्रतिमा, पुरानी परंपराएं और सिंजारा उत्सव इसे गणेश चतुर्थी के दौरान विशेष धार्मिक आकर्षण बनाते हैं।
