IAF Honey Trap Case में भारतीय वायुसेना के एक सेवारत विंग कमांडर पर संवेदनशील रक्षा जानकारी साझा करने के गंभीर आरोप लगे हैं। दिल्ली पुलिस ने अधिकारी को 30 मई को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आई एक महिला ने अधिकारी को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाया।
अधिकारी के खिलाफ Official Secrets Act के तहत मामला दर्ज किया गया है। करीब दो महीने बाद भी उसने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है और फिलहाल तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ था संपर्क
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक महिला ने सोशल मीडिया के जरिए विंग कमांडर से संपर्क किया। जांचकर्ताओं को शक है कि वह पाकिस्तानी खुफिया हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रही थी।
दोनों के बीच चैट और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क बढ़ा। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी दौरान अधिकारी ने महिला के साथ कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और संवेदनशील डेटा डिजिटल माध्यम से साझा किया।
सहयोगी के फोन में ऐप इंस्टॉल कराने का भी आरोप
जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोप है कि विंग कमांडर ने अपने एक सहयोगी के मोबाइल में एक खास एप्लिकेशन इंस्टॉल करने को कहा था। एजेंसियों को संदेह है कि इसका इस्तेमाल फोन से डेटा हासिल करने या उसे दूर से एक्सेस करने के लिए किया जा सकता था। इसकी वास्तविक प्रकृति जांच का विषय है।
IAF की इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की। अधिकारी को पहले पुलिस हिरासत और बाद में न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
30 जुलाई को दाखिल हुई चार्जशीट
मामले में 30 जुलाई को सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित रूप से साझा की गई जानकारी किस तक पहुंची और क्या इसके पीछे कोई बड़ा विदेशी जासूसी नेटवर्क सक्रिय था।
फिलहाल IAF Honey Trap Case अदालत में विचाराधीन है और आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
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