पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय विवाद के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अंदर और बाहर राष्ट्रवाद स्थापित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कथित “टुकड़े-टुकड़े गिरोह” और “जिहादी” तत्वों पर भी निशाना साधा। उनका यह बयान विश्वविद्यालय में हाल में हुई हिंसा के बाद आया है।
वंदे मातरम् को लेकर क्या बोले शुभेंदु?
कोलकाता के भवानीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दे पर उनकी सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।
उन्होंने दावा किया कि जादवपुर विश्वविद्यालय में कुछ तत्व वंदे मातरम् गाने का विरोध करते हैं। इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने और स्वतंत्रता दिवस तथा गणतंत्र दिवस मनाने को लेकर भी आरोप लगाए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
शुभेंदु ने कहा कि उनकी सरकार जादवपुर विश्वविद्यालय के अंदर और बाहर राष्ट्रवाद स्थापित करेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय में भारतीय और सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने की बात भी कही।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से जोड़ते हुए कहा कि उनकी सरकार उनके सपनों को पूरा करने के संकल्प के साथ सत्ता में आई है।
विश्वविद्यालय में क्यों बढ़ा विवाद?
जादवपुर विश्वविद्यालय में तनाव की शुरुआत छात्र संघ की एक आम बैठक के दौरान हुई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वामपंथी छात्र संगठन से जुड़े छात्रों के बीच पहले बहस हुई। बाद में यह विवाद हिंसक टकराव में बदल गया।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगाया। कई छात्रों के घायल होने की भी खबर सामने आई।
इसके बाद अगले दिन भी विश्वविद्यालय के आसपास तनाव बना रहा। अलग-अलग छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए और पुलिस को बड़ी संख्या में तैनात करना पड़ा।
छात्रों और शिक्षकों ने किया विरोध
घटना के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों, पूर्व छात्रों और शिक्षकों ने परिसर में हुई हिंसा और तोड़फोड़ का विरोध किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय में बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ मार्च भी निकाला।
शिक्षकों के एक वर्ग ने काम रोककर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने उन्हें “राष्ट्रविरोधी” बताए जाने पर भी आपत्ति जताई।
इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने अधिक पूर्व सैनिकों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाने और शरीर पर लगाए जाने वाले कैमरों के इस्तेमाल की योजना बताई है।
फिलहाल जादवपुर विश्वविद्यालय विवाद छात्र राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रवाद, परिसर की स्वायत्तता और राजनीतिक हस्तक्षेप की बड़ी बहस में बदल गया है। शुभेंदु अधिकारी के ताजा बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
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