गुरुग्राम: Punjab and Haryana High Court ने शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस अभियान पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया, जिससे प्रशासन को अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई जारी रखने की अनुमति मिल गई है।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि सड़कों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया गया अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग खारिज करते हुए कहा कि बढ़ते अतिक्रमण से आम लोगों को गंभीर परेशानी हो रही है और कई इलाकों में पैदल चलने की जगह तक नहीं बची है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की बेंच ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून के अनुसार और उचित प्रक्रिया (Due Process) का पालन करते हुए की जानी चाहिए।
साथ ही, कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि बिना नोटिस के कोई भी मनमानी कार्रवाई न की जाए।
S+4 पॉलिसी पर रोक बरकरार
हाईकोर्ट ने स्टिल्ट प्लस 4 फ्लोर (S+4) बिल्डिंग पॉलिसी पर पहले से लगी अंतरिम रोक को जारी रखा है। कोर्ट ने इस नीति पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे सड़क, सीवरेज और पानी—पर दबाव बढ़ रहा है और सुरक्षा जोखिम भी पैदा हो रहे हैं।
हालांकि, यह रोक केवल गुरुग्राम जिले तक सीमित है, पूरे हरियाणा में नहीं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
इस मामले में Supreme Court of India ने भी हस्तक्षेप करने से इनकार किया था और याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।
क्यों चल रहा है अभियान?
गुरुग्राम में पिछले कुछ वर्षों में अवैध निर्माण, फ्लोर एक्सटेंशन, स्टिल्ट का गलत इस्तेमाल और सड़कों पर कब्जे की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।
Haryana Shahari Vikas Pradhikaran, Department of Town and Country Planning Haryana और नगर निगम की टीमों द्वारा इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
शहरी योजनाकारों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि बिना अतिक्रमण हटाए गुरुग्राम को व्यवस्थित और रहने योग्य शहर बनाना संभव नहीं है। हाईकोर्ट के इस फैसले को वे शहर के भविष्य के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं।
