बिहार छात्र आंदोलन 2026 का मौजूदा संगठित चरण 18 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग में चल रहा है। मौजूदा धरना टीआरई-4 की अधिसूचना और भर्ती से जुड़ी मांगों के साथ शुरू हुआ। इसके बाद परीक्षा प्रारूप, निगेटिव मार्किंग, 70वीं बीपीएससी परीक्षा, बीएसएससी की लंबित भर्तियां, डोमिसाइल और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे आंदोलन के केंद्र में आ गए।
18 अगस्त को कैसे शुरू हुआ आंदोलन?
13 अगस्त को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की बैठक के बाद 18 अगस्त से गर्दनीबाग में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई थी।
18 अगस्त को ही बिहार लोक सेवा आयोग ने टीआरई-4 के तहत 32,388 शिक्षक पदों की अधिसूचना जारी कर दी। हालांकि अधिसूचना आने के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हुआ, क्योंकि अभ्यर्थियों और आयोग के बीच परीक्षा के प्रारूप को लेकर मतभेद बने रहे।
छात्र टीआरई-4 को एक चरण में कराने और निगेटिव मार्किंग हटाने की मांग कर रहे हैं। वहीं बीपीएससी ने कहा है कि वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग जारी रहेगी और परीक्षा कम से कम दो चरणों में होगी।
अभ्यर्थी कई पालियों में परीक्षा होने की स्थिति में नॉर्मलाइजेशन को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
आंदोलन में दूसरे मुद्दे कैसे जुड़े?
गर्दनीबाग में धीरे-धीरे एक दर्जन से अधिक छात्र और नौकरी अभ्यर्थी समूह अलग-अलग मांगों के साथ जुड़ गए।
कुछ अभ्यर्थी 70वीं बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगाए हैं। हालांकि बीपीएससी ने इन आरोपों को खारिज किया है और सोशल मीडिया पर वायरल एक उत्तर पुस्तिका को भी फर्जी बताया है।
इसके अलावा बीएसएससी की लंबित भर्तियां, आयु सीमा में राहत, डोमिसाइल नीति, पुलिस भर्ती, लाइब्रेरियन नियुक्ति और भर्ती कैलेंडर जैसे मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं। अलग-अलग संगठनों की मांगों में कुछ अंतर है।
24 अगस्त की बातचीत से क्यों नहीं निकला समाधान?
24 अगस्त को छात्र प्रतिनिधियों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। टीआरई-4 के पाठ्यक्रम और परीक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ सुझावों पर चर्चा हुई, लेकिन छात्रों की एकल परीक्षा और निगेटिव मार्किंग हटाने की प्रमुख मांगों पर अंतिम सहमति नहीं बनी।
इसी दिन बीपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की “हाथी चले बाजार…” वाली टिप्पणी पर विवाद बढ़ गया। उन्होंने बाद में कहा कि उनकी बात को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और किसी की भावना आहत हुई हो तो उन्हें खेद है। इसके बाद बिहार सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।
25 अगस्त को पटना में क्या हुआ?
25 अगस्त को छात्र और नौकरी अभ्यर्थी “सीएम हाउस घेराव” के घोषित कार्यक्रम के तहत गांधी मैदान से निकले।
जेपी गोलंबर से आगे बढ़ने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की। डाकबंगला चौराहे पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई।
पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में हल्का लाठीचार्ज भी हुआ। करीब 25 छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में बिना औपचारिक गिरफ्तारी के छोड़ दिया गया। दो पुलिसकर्मियों के घायल होने और एक छात्रा के बेहोश होने की भी रिपोर्ट सामने आई।
अब क्या है बिहार छात्र आंदोलन 2026 की स्थिति?
25 अगस्त की कार्रवाई के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से मुलाकात की। छात्र नेताओं ने बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि उन्हें जल्द जवाब मिलने का भरोसा दिया गया है।
हालांकि 26 अगस्त तक टीआरई-4 को एकल परीक्षा बनाने, निगेटिव मार्किंग हटाने, 70वीं बीपीएससी परीक्षा रद्द करने या डोमिसाइल की मांग पर कोई अंतिम सरकारी फैसला सामने नहीं आया है।
सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति, विद्यार्थी सहयोग शिविर, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और 1100 हेल्पलाइन जैसे कदम उठाए हैं।
फिलहाल बिहार छात्र आंदोलन 2026 समाप्त नहीं हुआ है। आंदोलन की आगे की दिशा अब बिहार सरकार और बीपीएससी के अगले औपचारिक फैसले पर निर्भर करेगी।
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