भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों को लेकर विवाद चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। दोनों अधिकारी अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं।
कौन हैं सुखबीर सिंह संधू?
डॉ. सुखबीर सिंह संधू 1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। इससे पहले वह जुलाई 2021 से जनवरी 2024 तक उत्तराखंड के मुख्य सचिव रहे।
संधू भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त सचिव और लोकपाल के सचिव की जिम्मेदारी भी संभाली है। उनकी शैक्षणिक योग्यता में MBBS और इतिहास में मास्टर डिग्री शामिल हैं।
कौन हैं विवेक जोशी?
डॉ. विवेक जोशी 1989 बैच के हरियाणा कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने 19 फरवरी 2025 को निर्वाचन आयुक्त का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह हरियाणा के मुख्य सचिव थे।
जोशी केंद्र सरकार में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव और वित्तीय सेवा विभाग के सचिव रह चुके हैं। उन्होंने भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के रूप में भी काम किया है। उन्होंने IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और जिनेवा से अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल की।
आपत्तियों का मामला क्या है?
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटाबेस के नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर थीं।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया है और SIR सहित उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। संधू और जोशी ने इन आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।
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