बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन और सोशल मीडिया पर वायरल कुछ रील्स पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने ‘जेन ज़ी’ की एक हिस्से को ‘गटर जेनरेशन’ कहा। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस बयान पर तीखी बहस शुरू हो गई। वहीं, CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी कंगना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा।
क्या था पूरा विवाद?
हाल ही में नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन हुआ था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो और रील्स वायरल हुए।
इन वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतना खराब व्यवहार पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने कुछ युवाओं की भाषा और आचरण की आलोचना करते हुए उन्हें ‘गटर जेनरेशन’ बताया। उनका कहना था कि इस तरह का व्यवहार भारतीय संस्कृति और सामाजिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
बयान पर शुरू हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया
कंगना के बयान के बाद विपक्षी नेताओं सहित कई लोगों ने इसकी आलोचना की। इसी बीच CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी प्रतिक्रिया दी।
सौरव दास ने कहा कि कंगना रनौत को उनके अपने राजनीतिक दल में भी गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसलिए उनके अनुसार युवाओं को भी ऐसे बयानों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अपने मुद्दों पर खुद निर्णय लेने में सक्षम है।
कंगना ने वीडियो जारी कर दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि मीडिया उनके बयान को गलत तरीके से पेश कर रहा है।
कंगना के मुताबिक, उनका विरोध पूरी जेन ज़ी पीढ़ी से नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल उन लोगों के व्यवहार की आलोचना की थी, जो सार्वजनिक स्थानों पर कथित रूप से अश्लील भाषा और अभद्र आचरण को सामान्य बना रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ मर्यादा और जिम्मेदारी भी जरूरी है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात भी कही।
पहले भी विवादों में रही हैं कंगना रनौत
यह पहला मौका नहीं है जब कंगना रनौत अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आई हैं। किसान आंदोलन, बॉलीवुड, सामाजिक मुद्दों और राजनीति पर दिए गए उनके कई पुराने बयान भी विवादों का कारण बन चुके हैं। इनमें किसान आंदोलन से जुड़ी टिप्पणियां और बाद में उन पर दी गई सफाइयां भी शामिल हैं।
निष्कर्ष
फिलहाल यह विवाद कंगना रनौत के बयान और उस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित है। एक ओर कंगना अपने बयान को कुछ प्रदर्शनकारियों के व्यवहार तक सीमित बता रही हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि इसे पूरी युवा पीढ़ी के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बहस राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और तेज हो सकती है।
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