कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली में प्रस्तावित CJP September 5 March को वापस लेने का ऐलान किया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIRs को खत्म करने के आदेश के बाद लिया गया। कोर्ट ने यह कदम केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के अनुरोध पर उठाया।
सुप्रीम कोर्ट में CJP ने वापस लिया मार्च
सुनवाई के दौरान CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर के मार्च को वापस लेना उचित समझा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने भी इस फैसले की सराहना की। कोर्ट ने Article 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए छात्रों से जुड़े मामलों में राहत दी।
हालांकि, यह राहत सभी मामलों में लागू नहीं होगी। रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर आपराधिक मामलों वाले 2,873 लोगों के खिलाफ पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रख सकती है।
सरकार ने दिए थे तीन प्रमुख आश्वासन
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार CJP नेतृत्व को दिए गए तीन प्रमुख आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इनमें 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज FIRs को आगे नहीं बढ़ाना, इस मामले से जुड़े नए FIR दर्ज नहीं करना और NEET विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है। मुआवजे की प्रक्रिया तय करने के लिए सरकार ने तीन महीने का समय मांगा है।
CJP ने पहले आरोप लगाया था कि 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कराते समय किए गए वादे पूरे नहीं हुए। इसी वजह से 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च का ऐलान किया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र के आश्वासन के बाद CJP September 5 March आधिकारिक रूप से वापस ले लिया गया है।
और पढे:
Ashutosh Ranka Jaipur Attack: स्कूल दौरे के दौरान CJP टीम से मारपीट, BJP पर लगाए आरोप
फॉलो करे: bh24newsweb
