सोने की मांग में गिरावट : नई दिल्ली
भारत में सोने की मांग में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ज्वेलरी उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान सोने की खरीदारी में लगभग 70 प्रतिशत की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने पर आयात शुल्क में हुई बढ़ोतरी, बढ़ती कीमतें और सरकार की ओर से सोने की खरीद कम करने की अपील इसके प्रमुख कारण हैं।
आयात शुल्क बढ़ने से महंगा हुआ सोना
सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। आयात लागत बढ़ने का सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ा, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया। कीमतों में इस वृद्धि ने मांग को प्रभावित किया है।
सोने की मांग में गिरावट : दो सप्ताह में मांग में आई बड़ी गिरावट
बाजार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, मई के अंतिम पखवाड़े में सोने की मांग घटकर लगभग 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 25 टन था। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची कीमतों के कारण ग्राहक फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं और बाजार में सुस्ती का माहौल बना हुआ है।
प्रधानमंत्री की अपील का भी पड़ा असर
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी। सरकार का उद्देश्य सोने के आयात को नियंत्रित कर चालू खाता घाटे और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। कारोबारियों का मानना है कि इस अपील का भी उपभोक्ताओं के व्यवहार पर प्रभाव पड़ा है।
महंगाई और आर्थिक दबाव से बदली प्राथमिकताएं
लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की क्रय शक्ति को प्रभावित किया है। घरेलू खर्च बढ़ने के कारण लोग निवेश और लग्जरी खरीदारी को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं। ऐसे में सोने जैसी महंगी धातु की खरीदारी पर उपभोक्ता फिलहाल कम ध्यान दे रहे हैं।
ज्वेलरी कारोबारियों की बढ़ी चिंता
सोने की मांग में आई इस भारी गिरावट से ज्वेलरी कारोबार प्रभावित हुआ है। छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों का कहना है कि बिक्री में आई कमी से कारोबार पर दबाव बढ़ा है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि मांग में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में इसका असर रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
सोने की मांग में गिरावट : आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की मांग में सुधार काफी हद तक कीमतों की स्थिरता और उपभोक्ता विश्वास पर निर्भर करेगा। आगामी त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन में बाजार की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि फिलहाल सोने का बाजार दबाव में नजर आ रहा है और कारोबारियों की निगाहें सरकार की आगामी नीतियों पर टिकी हुई हैं।
यह भी पढ़े : ipl 2026 qualifier
