Ken-Betwa Project के खिलाफ चिता आंदोलन और फांसी सत्याग्रह करते आदिवासी परिवारों का प्रतीकात्मक दृश्य।

Ken-Betwa Project Protest: MP में ‘चिता’ और ‘फांसी’ सत्याग्रह क्यों कर रहे आदिवासी परिवार?

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मध्य प्रदेश में Ken-Betwa Project के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने नया रूप ले लिया है। छतरपुर और पन्ना जिलों के प्रभावित आदिवासी परिवारों ने ‘चिता आंदोलन’ और प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ शुरू किया है। उनका आरोप है कि उन्हें जमीन से बेदखल किया जा रहा है, लेकिन अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला है।

यह आंदोलन 3 जुलाई से बराना नदी के किनारे कुपी गांव के पास चल रहा है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं शामिल हैं। आंदोलनकारी ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और ‘फांसी सत्याग्रह’ जैसे प्रतीकात्मक तरीकों से विरोध दर्ज करा रहे हैं।

पुलिस कार्रवाई और अनशन

रविवार को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल को खाली कराया। प्रशासन ने आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर को अस्पताल पहुंचाया। वे पिछले 11 दिनों से अनशन पर बैठे थे। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए की गई।

दूसरी ओर, आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को जबरन खत्म किया गया। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों की मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।

क्या है Ken-Betwa Project?

Ken-Betwa Link National Project देश की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन नदी पर बनाई जा रही है। इसमें भूमिगत दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार:

  • परियोजना की अनुमानित लागत ₹44,605 करोड़ है।

  • इसमें ₹39,317 करोड़ की केंद्रीय सहायता दी जाएगी।

  • परियोजना से मध्य प्रदेश के 44 लाख और उत्तर प्रदेश के 21 लाख लोगों को पेयजल मिलने का दावा है।

  • साथ ही 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

आंदोलनकारियों की मुख्य आपत्तियां

अमित भटनागर और अन्य प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवार अपनी जमीन, जंगल, जल स्रोत और आजीविका खो रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ परिवारों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए, बिजली कनेक्शन काटे गए और स्कूलों को नुकसान पहुंचाया गया।

पर्यावरण समूह भी परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पन्ना टाइगर रिजर्व के कुछ हिस्सों और आसपास के वन क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।

प्रशासन का क्या कहना है?

बिजावर के एसडीएम विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन को आंदोलन की जानकारी मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की है और उनकी मांगों का आकलन किया जा रहा है। पन्ना और छतरपुर के प्रभावित लोगों की शिकायतों पर संबंधित जिला प्रशासन कार्रवाई करेगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है और अमित भटनागर को अस्पताल ले जाने पर चिंता जताई है। फिलहाल Ken-Betwa Project को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव जारी है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

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