लंबे तनाव के बाद अंकारा ने दिए दोस्ती के संकेत, बदलते वैश्विक समीकरणों ने बढ़ाया भारत का महत्व
भारत और तुर्की के संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। कश्मीर मुद्दे पर तुर्की के बयानों और पाकिस्तान के प्रति उसके खुले समर्थन के कारण दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ गई थी। हालांकि अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं और तुर्की की ओर से भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के संकेत मिल रहे हैं।
पाकिस्तान के समर्थन ने बढ़ाई थी दूरियां
तुर्की लंबे समय से पाकिस्तान का करीबी सहयोगी रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करने और भारत-पाक तनाव के दौरान इस्लामाबाद के पक्ष में खड़े होने से नई दिल्ली और अंकारा के रिश्तों में खटास आई थी।
भारत-तुर्की संबंध : भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत बनी अहम वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति ने तुर्की को अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। भारत आज कई महत्वपूर्ण देशों का रणनीतिक साझेदार बन चुका है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय भूमिका लगातार मजबूत हुई है।
क्षेत्रीय चुनौतियों से बढ़ा तुर्की पर दबाव
तुर्की को हाल के वर्षों में कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वहीं भारत ने साइप्रस और आर्मेनिया जैसे देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं। इन बदलते समीकरणों ने भी तुर्की को भारत के साथ संवाद बढ़ाने की दिशा में सोचने पर मजबूर किया है।
भारत-तुर्की संबंध : रिश्तों में नई शुरुआत की कोशिश
हाल ही में तुर्की के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ तुर्की की मित्रता को भारत विरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह बयान दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के नए दौर भी शुरू हुए हैं।
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