मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ज्ञानेश कुमार को CEC के तौर पर कुछ कार्य करने से रोकने की मांग भी की है।
क्या है पूरा मामला ?
पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव संबंधी शक्तियां चुनाव आयोग के पास हैं और आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था के रूप में काम करता है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने कुछ मामलों में आयोग की सामूहिक प्रक्रिया के बजाय व्यक्तिगत रूप से अधिकारों का इस्तेमाल किया। याचिका में इस संबंध में quo warranto जारी करने की मांग की गई है, ताकि यह तय हो सके कि किन कानूनी अधिकारों के तहत ऐसे फैसले लिए गए।
SIR को लेकर भी उठे सवाल
मामला मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) से भी जुड़ा है। याचिका में SIR और इससे संबंधित फैसलों की वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने आयोग से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और विवादित प्रक्रियाओं पर आगे की कार्रवाई रोकने की मांग भी की है।
हालांकि, इन आरोपों को अभी अदालत ने सही नहीं ठहराया है। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।
अब अगले सप्ताह क्या होगा ?
29 सितंबर को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिका का उल्लेख किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने जल्द सुनवाई की मांग की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर होने वाली सुनवाई में अब सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि उठाए गए कानूनी और संवैधानिक सवालों पर आगे सुनवाई की जरूरत है या नहीं।
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