होर्मुज जलडमरूमध्य संकट, अमेरिका, इजरायल, ईरान के तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा

होर्मुज जलडमरू संकट: भारत ने क्यों उठाई रास्ता खोलने की मांग?

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मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधे पड़ रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरू (Strait of Hormuz) में हुए हमलों और व्यवधानों के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसी बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस अहम समुद्री रास्ते को तुरंत और बिना शर्त खोलने की जोरदार मांग की है।

भारतीय नाविकों की मौत से बढ़ी चिंता

होर्मुज क्षेत्र में हाल के हमलों में कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक लापता है। ये नाविक विदेशी झंडे वाले मर्चेंट जहाजों पर काम कर रहे थे। भारत इस मामले में दुनिया का एकमात्र देश है जिसके नागरिकों की जान गई है।विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई 60 से अधिक देशों की बैठक में यह मुद्दा उठाया और कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। सरकार ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री मार्गों की सुरक्षा की अपील की है।

क्यों जरूरी है होर्मुज का खुलना?

होर्मुज जलडमरू दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इसी रास्ते से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है।
अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो इसका असर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज का संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन कीमतों और व्यापार पर सीधा असर डाल रहा है।

भारत ने क्या कहा?

भारत ने साफ तौर पर कहा है कि इस मार्ग को जल्द से जल्द खोला जाना चाहिए ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।
विदेश सचिव ने बैठक में जोर दिया कि होर्मुज जलडमरू संकट सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता, लोगों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति का भी सवाल है। भारत सरकार का मानना है कि समुद्री हमले अस्वीकार्य हैं और सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही बातचीत

ब्रिटेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में 60 से ज्यादा देशों ने होर्मुज को तुरंत खोलने की अपील की। भारत भी इन चर्चाओं में सक्रिय रूप से शामिल है। कुछ भारतीय जहाजों (लगभग छह) को अब तक सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिली है, लेकिन कई जहाज अभी भी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।भारतीय नौसेना ऑपरेशन उर्जा सुरक्षा के तहत क्षेत्र में युद्धपोत तैनात कर रही है ताकि भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ऊर्जा और व्यापार पर बड़ा असर

तेल और एलपीजी आयात प्रभावित होने से ईंधन की कीमतें बढ़ने का खतरा।
हजारों भारतीय नाविक (कुछ रिपोर्ट्स में 20,000 से ज्यादा) क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षा और वापसी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई में दिक्कत आ सकती है।

निष्कर्ष

होर्मुज जलडमरू संकट का मुद्दा अब केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक व्यापार को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग को जल्द से जल्द खोलने की मांग उठाई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों से स्थिति सामान्य होती है या नहीं। भारत इस मुद्दे पर निरंतर निगरानी रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।

(यह लेख हाल की घटनाओं और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नवीनतम अपडेट के लिए विश्वसनीय स्रोतों पर नजर रखें।)

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Posted by - August 28, 2024 0
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