धनतेरस 2025 भोग रेसिपी: सीताफल की खीर

धनतेरस 2025 भोग रेसिपी: आसान सीताफल की खीर बनाने का तरीका

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धनतेरस 2025 भोग रेसिपी: सीताफल की खीर
सीताफल की खीर इस दिवाली के शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर को भोग चढ़ाये

धनतेरस 2025 भोग रेसिपी: सीताफल की खीर इस दिवाली के शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर को चढ़ाने के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है। वास्तव में(Actually) यह मिठाई केवल स्वाद में ही नहीं बल्कि शुभता में भी महत्वपूर्ण है। सीताफल, जिसे शरीफा या कस्टर्ड एप्पल भी कहते हैं, माता लक्ष्मी का प्रिय फल माना जाता है। इसलिए (Therefore) इस खीर को प्रसाद बनाकर  में चढ़ाने से धन और समृद्धि के लिए विशेष आशीर्वाद मिलता है।

 सामग्री(Ingredients)

  • सीताफल (शरीफा) – 2 मध्यम आकार के

  • दूध – 1 लीटर

  • चीनी – 4-5 टेबलस्पून (स्वाद अनुसार)

  • इलायची पाउडर – ½ टीस्पून

  • ड्राई फ्रूट्स (काजू, बादाम, मखाना) – ¼ कप

विधि (Recipe Method)

  1. सबसे पहले (Firstly) सीताफल को छीलकर इसके बीज निकाल लें और पल्प को हल्का मैश करें।

  2.  इसके बाद (Next) एक कड़ाही में दूध उबालें और लगातार चलाते हुए गाढ़ा होने दें।

  3.  फिर (Then) दूध में ड्राई फ्रूट्स डालें। आप चाहें तो इन्हें हल्का रोस्ट कर सकते हैं।

  4.  उसके बाद (After that) दूध में चीनी और इलायची पाउडर मिलाएँ। जब दूध गाढ़ा हो जाए, तो इसमें मैश किया हुआ सीताफल पल्प डालें और धीरे-धीरे मिलाएँ।

  5.  अंत में (Finally) खीर को 2-3 घंटे फ्रिज में रखकर ठंडा करें। ठंडी खीर का स्वाद गर्म खीर से भी ज्यादा टेस्टी लगता है।धनतेरस 2025 भोग रेसिपी तैयार है।

धनतेरस के बारे में

 वास्तव में (Actually) धनतेरस हिन्दू धर्म में दिवाली महापर्व की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन इस दिन (On this day) सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। इसे स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान धन्वंतरि ने इसी दिन अमृत का बर्तन धरती पर उतारा था और इसीलिए इसे आयु और स्वास्थ्य का प्रतीक भी माना जाता है।  इसलिए(Therefore) लोग इस दिन घर और ऑफिस में सफाई करते हैं, लक्ष्मी-धन की पूजा करते हैं और नए व्यवसायिक या व्यक्तिगत निवेश की शुरुआत करते हैं। इसके अलावा (Moreover) धनतेरस पर विशेष रूप से सोने, चांदी और कीमती वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है। यही कारण है कि धनतेरस का त्योहार केवल भौतिक संपत्ति के लिए ही नहीं बल्कि आस्था और शुभकामनाओं के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है।

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