Kartik Amavasya 2025: पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व जानें

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सनातन धर्म में कार्तिक अमावस्या (Kartik Amavasya 2025) का विशेष महत्व (importance) माना जाता है। हर साल यह दिन (every year, annually) दीपावली के उत्सव (festival) से जुड़ा होता है। इसलिए (therefore), यह केवल एक अमावस्या नहीं बल्कि घर में सुख-समृद्धि और शांति लाने का अवसर भी माना जाता है। इसके अतिरिक्त (additionally), पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि “यह मेरा प्रिय दिन है, और इस दिन मेरी पूजा करने से सभी ग्रह दोष दूर होते हैं।”

कब है कार्तिक अमावस्या 2025? (Kartik Amavasya 2025 Date and Time)

  • तिथि: मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025

  • अमावस्या प्रारंभ: 20 अक्टूबर 03:44 PM

  • अमावस्या समाप्त: 21 अक्टूबर 05:54 PM

इस वर्ष (this year) अमावस्या दो दिन तक है, इसलिए (thus) 20 अक्टूबर को दीपावली मनाई जाएगी और 21 अक्टूबर को स्नान, दान और तर्पण जैसे अनुष्ठान संपन्न होंगे। इसके अलावा (moreover), इस बार अमावस्या का दो दिवसीय होना पूजा और तर्पण के महत्व को और बढ़ाता है।

Kartik Amavasya 2025 पूजा विधि: दीपक और तुलसी के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कृष्ण की उपासना करते भक्त।

कार्तिक अमावस्या पूजा विधि (Kartik Amavasya Puja Vidhi)

सबसे पहले (firstly), प्रातःकाल पवित्र जलाशय में स्नान करें। इसके बाद (then), सूर्य देव को अर्घ्य दें और तिल बहते हुए जल में प्रवाहित करें। इससे (thus) नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

फिर (next), मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और तुलसी जी की विधि-विधान से पूजा करें। इसके साथ ही (along with), घर के मंदिर में दीप जलाएं और फूल, रोली, अक्षत आदि अर्पित करें।

इसके अलावा (furthermore), विष्णु सहस्रनाम और नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। ऐसा करने से (therefore) ग्रह दोष कम होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।

अंत में (finally), शिव भक्तों को शिवलिंग का शहद से अभिषेक करना चाहिए। इससे (thus) स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)

असल में (actually), कार्तिक अमावस्या पूजा, दान और भक्ति का दिन है। इसलिए (therefore), इस दिन की साधना से घर में मां लक्ष्मी की कृपा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही (alongside), भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

इसलिए (thus), जो व्यक्ति श्रद्धा, भक्ति और दान के साथ पूजा करता है, उसके जीवन में कभी धन और सौभाग्य की कमी नहीं रहती। इसके अतिरिक्त (additionally), यह दिन आध्यात्मिक रूप से भी बहुत फलदायक होता है और मनुष्य को समृद्धि, सुख और मानसिक शांति प्रदान करता है।

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