इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: शादीशुदा पुरुष का लिव-इन रिलेशन अपराध नहीं
Allahabad High Court live-in rule में एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि शादीशुदा पुरुष का किसी वयस्क महिला के साथ सहमति से रहना अपने आप में अपराध नहीं है। यह Live-in Relationship Court Decision देश में चल रही कानूनी बहस के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या कहा कोर्ट ने?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोनों पक्ष वयस्क हैं और रिश्ता आपसी सहमति से है, तो इसे Live-in relationship legal in India के दायरे में देखा जाएगा। सिर्फ साथ रहने के आधार पर किसी को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।
हर मामला अलग: कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने यह भी कहा कि हर केस अलग होता है। अगर किसी मामले में धोखाधड़ी, जबरदस्ती या किसी कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो Married man live-in relationship law के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पहले भी आ चुके हैं ऐसे फैसले
भारत में पहले भी कई बार अदालतों ने Live-in relationship court judgement India को लेकर स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों का साथ रहना अपराध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी इस बात को कई बार दोहरा चुका है।
क्या होगा इसका असर?
इस Live-in Relationship Court Decision का असर उन मामलों पर पड़ सकता है जहां बिना किसी ठोस आधार के लिव-इन रिश्तों को आपराधिक बना दिया जाता है। इससे भविष्य में कानूनी मामलों में स्पष्टता बढ़ेगी।
निष्कर्ष
यह Allahabad High Court live-in rule समाज और कानून दोनों के बदलते नजरिए को दर्शाता है।
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